ललितपुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तर प्रदेश एवं नेहरू महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में संस्कृत सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आज विधिवत समारोहपूर्वक समापन हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. महेश पांडे, महामंत्री अखिल भारतीय साहित्य परिषद, उ.प्र., विशिष्ट अतिथि प्रदीप चौबे प्रबंधक नेमवि ललितपुर, शरद खैरा अध्यक्ष-प्रबंध समिति, नेमवि, एवं अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर ओम प्रकाश शास्त्री प्राचार्य नेमवि ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन करके किया।
संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ महेश पांडे, महामंत्री अखिल भारतीय साहित्य परिषद उ.प्र. ने कहा कि तुलसीदास ने अपने कृतित्व के जरिए समाज और राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि तुलसी ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जो स्वरूप दिया, जिनकी मर्यादा करना दया, शौर्य और साहस जैसे सद्गुणों से प्रेरित होकर एक अच्छा इंसान बनने की राह पर आगे बढ़ सकता है। एक अच्छा इंसान ही अपने समाज और राष्ट्र के प्रति अपने नैतिक कर्तव्य और दायित्व का सही निर्वहन कर सकता है। वर्तमान समय में प्रत्येक मानव को तुलसी की चौपाइयों का अनुशीलन करना चाहिए तभी सामाजिक समरसता का सपना पूर्ण हो सकता है। तुलसी ने अपने साहित्य में राम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया है।
विशिष्ट अतिथि नेमवि प्रबंधक प्रदीप चौबे ने कहा कि विश्व कवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस भारत में ही नहीं वरन संपूर्ण विश्व में विख्यात है। यह भारतीय धर्म और संस्कृति को प्रतिबिंबित करने वाला एक ऐसा निर्मल दर्पण है, जो संपूर्ण विश्व में एक अनुपम एवं अतुलनीय ग्रंथ के रूप में स्वीकार किया जाता है। उन्होंने कहा कि तुलसी समन्वयात्मक दृष्टिकोण के समर्थक थे, इसलिए तुलसी को लोकनायक कहा जाता है। सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों का सबसे बड़ा उदाहरण राम का शबरी के प्रति निश्छल प्रेम है। वह हमारी आंखें खोल देने वाला दृश्य है। उन्होंने समाज सुधार के पावन उद्देश्य से राम भक्त की सरिता प्रभावित की और कायरता, निराशा आत्महीनता आदि की भावनाओं को मिटाकर साहस का संचार किया।
विशिष्ट अतिथि नेमवि प्रबंध समिति अध्यक्ष शरद खैरा ने कहा कि आज के भौतिक युग में जब भारत की प्राचीन संस्कृति विलुप्त हो रही है, ऐसे समय में हम रामचरितमानस में वर्णित नीति एवं आचार के द्वारा संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं। उन्होंने आवाहृन किया कि हम सभी प्रतिदिन अनिवार्य रूप से रामचरित्र मानस का परायण कर सामाजिक वातावरण को ऊर्जावान बनायें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य नेमवि प्रो. ओम प्रकाश शास्त्री ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस सम्पूर्ण जनमानस के लिए हर क्षेत्र में अनुकरणीय है। उन्होंने तुलसी को युगदृष्टा बताते हुए कहा कि तुलसी ने तत्कालीन समाज की परिस्थितियों का गहन अवलोकन करने के पश्चात अनेक मतों का समन्वय करते हुए आदर्श समाज की स्थापना के लक्ष्य को रामचरितमानस में मूर्त रूप दिया है। उन्होंने कहा कि जब की परतंत्र भारत में मुगल शासन में भारतीय संस्कृति वेदों और शास्त्रों को दूषित करने का कुचक्र चल रहा था, ऐसे भीषण काल में भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं समाज को चेतना प्रदान करने हेतु संतप्रबर तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना कर संपूर्ण जनमानस का कल्याण किया। उन्होंने कहा कि तुलसी का सम्पूर्ण साहित्य विनय पत्रिका, कवितावली, रामललानैछू, दोहावली, पार्वती मंगल, रामाज्ञा प्रश्नावली, हनुमान चालीसा, हनुमानवाहुक, गीतावली, जानकी मंगल आदि रचनाओं ने सैकड़ो वर्षों से भारतीय समाज को एकता के सूत्र में बांधकर रखा है।
विशिष्ट अतिथि आशीष तिवारी सहायक आचार्य हिंदी विभाग, कृष्ण विश्वविद्यालय छतरपुर ने कहा राम को एक आदर्श मानव के रूप में चुनने के मूल में जनसामान्य की धारणा रही है। इसलिए विस्तृत फलक पर श्रीराम का अकेला व्यक्तित्व दिखाई देता है, जो अनेक संस्कृतियों को अपने भीतर समेटे हुए हैं राम के अयोध्या से लंका तक की यात्रा एक दूसरे को जोड़ने की यात्रा है।
संगोष्ठी में प्रो. अनिल सूर्यवंशी, डाॅ. सुभाष जैन, डाॅ. ओ.पी.चौधरी, डाॅ. शैलेन्द्र सिंह चौहान, जितेन्द्र कुमार आदि ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। संगोष्ठी के सभी सत्रों में प्रो. आशा साहू, प्रो. अनिल सूर्यवंशी, हिमांश धर द्विवेदी, जितेन्द्र कुमार, श्रीमती अनीता, डाॅ. सुधाकर उपाध्याय, डाॅ. सूबेदार यादव, डाॅ. सुभाष जैन, डाॅ. दीपक पाठक, डाॅ. रामकुमार रिछारिया, डाॅ. सुभाष जैन, डाॅ. संजीव शर्मा, डाॅ. जितेन्द्र राजपूत, डाॅ. राजेश तिवारी, डाॅ. अनूप दीक्षित, डाॅ. विनोद कुमार, डाॅ. लक्ष्मीकांत मिश्रा, डाॅ. अवनीश त्रिपाठी, डाॅ. जगत कौशिक, डाॅ. शैलेन्द्र सिंह चौहान, डाॅ. जगवीर सिंह, डाॅ. विनीत अग्निहोत्री, डा. रोहित वर्मा, मनीष वर्मा, अशेष नारायण द्विवेदी, डाॅ. सत्य देव, डाॅ. पराग अग्रवाल, संदीप श्रीवास्तव, डाॅ. अमित सोनी, डाॅ. संतोष सिंह, इं. विपिन शुक्ला, डाॅ. सुनील शुक्ला, डाॅ. राजीव निरंजन, डाॅ. प्रीति सिरौठिया, डाॅ. वर्षा साहू, डाॅ. रेनू चंदेल, डाॅ. रजनी उपाध्याय, डाॅ. रिचाराज सक्सेना, श्रीमती कविता पैजवार, डाॅ. अभिलाषा साहू, सुश्री श्वेता आनन्द, डाॅ. ऊषा तिवारी, अतुल मिश्रा, विवेक पाराशर, फहीम बख्श, हरीप्रसाद, ध्रुव किलेदार, राजीव गोस्वामी, दीपक रावत, जयंत चौबे, अंकित चौबे, रामसहाय सिरौठिया, गजेन्द्र सिंह, संजय शर्मा, रमेश पाल, सुरेश पाल, हरदयाल, रामसेवक, राकेश कुमार, मिलन सेन, कमलेश कुमार, पुष्पेन्द्र तिवारी, हरि नारायण पाल, लक्ष्मीनारायण सोनी, कामता शर्मा आदि उपस्थित रहे। संचालन डाॅ. दीपक पाठक ने किया एवं प्रो. आशा साहू ने सभी का आभार जताया।



