मलेरिया विभाग की कार्यशैली पर सवाल – छिड़काव दिखावा, मच्छरों से राहत नहीं वार्डों में अभियान का दावा, लेकिन गली-गली पनप रहे मच्छर – बीमारियों से त्रस्त लोग

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ललितपुर। मलेरिया विभाग द्वारा जगह-जगह केमिकल छिड़काव और जागरूकता शिविर लगाने के दावे भले ही किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को खोखला साबित कर रही है। वार्ड नंबर 12 आजादपुरा द्वितीय समेत कई इलाकों में विभागीय टीम द्वारा “एंडीज मच्छर लार्वा नष्ट करने” का दावा किया गया, पर स्थानीय लोगों का कहना है कि मच्छरों का आतंक कम होने की बजाय और बढ़ गया है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक 10966 सर्वे और 74158 कंटेनर की जांच का दावा किया गया है, जिसमें 189 पॉजिटिव लार्वा नष्ट करने की बात कही गई। लेकिन सवाल उठता है कि इतने बड़े आंकड़े देने के बाद भी मोहल्लों और घरों में मच्छरों की भरमार क्यों है?

 

निवासियों का आरोप है कि विभागीय कर्मचारी सिर्फ “औपचारिक छिड़काव” कर जाते हैं। कई बार तो जिन गलियों में पानी जमा है, वहां टीम पहुंचती ही नहीं। ऐसे में विभाग के सर्वे और छिड़काव का असली लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।

 

स्थानीय नागरिकों ने विभाग से नाराजगी जताते हुए कहा कि “सिर्फ आंकड़े गिनाने और फोटो खिंचवाने से मलेरिया व संचारी रोग खत्म नहीं होंगे। ज़रूरी है कि विभाग ईमानदारी से काम करे और हर वार्ड में पूरी तरह छिड़काव सुनिश्चित करे।” जनहित में

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