ललितपुर। जैन अटा मंदिर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य निर्भयसागर महाराज ने कहा संस्कृति में देश सुरक्षित रहेगा जहां संस्कार रहेगे वही संस्कृति कायम रहेगी। संस्कृति के संवाहक संत है और भक्त को संत ही भगवंत का मार्ग बताते हैं। आचार्य श्री ने कहा संत से जुडा हुआ व्यक्ति कभी अन्याय नहीं कर सकता और न ही अधर्म। उन्होने मानव शरीर को वास्तु से बना घर बताया जिसमें आत्मा रूपी परमात्मा रहता है। उन्होंने कहा पहला सुख निरोगी काया दूसरा सुख घर में माया तीसरा सुख कुलवंती नारी चौथा सुख पुत्र हो आज्ञाकारी की सूक्ति का अनुसरण करने के लिए श्रावकों को सीख दी।
धर्मसभा का शुभारम्भ मंगलाचरण द्वारा अनीता मोदी एवं पदमा धनगौल ने किया जवकि पादप्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट राजेन्द्र जैन, रवीन्द्र दिवाकर,अक्षय अलया, अनंत सराफ, अजय जैन अजय बरया मनोज जैन, हितेन्द्र वडघरिया, अभिषेक अनौरा, शैलेश जैन, रवि जैन, नवीन थनवारा, मनीष पवैया द्वारा किया गया। जैन पंचायत के अध्यक्ष डा० अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, कैप्टन राजकुमार जैन, सनत खजुरिया, प्रबंधक अजय जैन गंगचारी, मनोज जैन बबीना, राजेन्द्र जैन थनवारा, आनंद जैन मावनगर ने पुर्ष्याजकों को सम्मानित किया। गौरतलब रहे कि वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भयसागर महाराज ससंघ पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में विराजमान है जहां धार्मिक शिक्षण संघस्थ मुनि शिवदत्त सागर महाराज, मुनि सुदत्त सागर महाराज, मुनि भूदत्त सागर महाराज, मुनि पदमदत्त सागर महाराज मुनि वृषभदत्त सागर महाराज, क्षुल्लक चन्ददत्त सागर महाराज एवं श्रीदत्तसागर महाराज द्वारा दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सायंकाल शंकासमाधान में पहुंचकर श्रावक अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पा रहे हैं।



