चुप रहना विद्वानों की निशानी और गृहस्थी में शान्ति का उपाय-आचार्य निर्भय सागर

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ललितपुर । सावरकर चौक स्थित जैन अटा मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक सन्त आचार्य श्री निर्भय महाराज ने कहा हमें आपस की लडाई झगड़े से बचना चाहिए और मौन रहने का संकल्प लेना चाहिए। हितकारी मीठे कम और धीरे बोलना चाहिए चुप रहना विद्वानों की निशानी है घर ग्रहस्थी में शांति का सबसे सरल उपाय है। तेज आवाज से बोलने पर अनेक प्रकार की शारीरिक हानि होती है अधिक बोलने से और झूठ बोलने से तनाव बढ़ता है डिप्रेशन की समस्या आती है मूड ऑफ हो जाता है घर में मन मोटाव होता है बोलने और सुनने वाले के अंदर उदासीनता और अरुचि पैदा होती है इसलिए अधिक बोलने में हानि ज्यादा और फायदा कम होता है। उन्होंने कहा विद्वान वही है जो कम बोलता है। आचार्य श्री ने कहा मंदिर में घंटा झालर बजाने से उत्पन्न हुई तरंगों से मंदिर से रोगाणु एवं वायरस निष्कासित हो जाते हैं और वातावरण पवित्र बना रहता है। ऐसी भक्ति करने से स्वास्थ्य लाभ भी होता है इस बात को डॉक्टर रॉबर्ट एवं डॉक्टर डि ब्राइन इत्यादि वैज्ञानिकों ने ध्वनि चिकित्सा के माध्यम से उपचार करना प्रारंभ किया है और उसे अनेक रोगियों को ठीक किया है। आचार्यश्री ने कहा संकट महापुरुषों के जीवन में आता है कायरों के नहीं। ग्रहण सूर्य चन्द्र को लगता है सितारों को नहीं मत कहो कि दिन खराब आए हैं। काॅंटो से घिर गए समझो गुलाब आज हैं।

गौरतलब रहे वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ससंघ सहित ललितपुर अटा मन्दिर में‌ विराजमान है । प्रतिदिन प्रातः आचार्य श्री द्वारा 8:30बजे से रयणसार ग्रंथ की वाचना दोपहर में 3:00बजे गोमट्टसार जीवकाण्ड विषय पर शिक्षण एवं शाम को शंका समाधान का कार्यक्रम निरन्तर चल रहा है । श्रावकों के लिए अलग अलग समय पर संघस्थ सभी मुनि राजों के द्वारा धार्मिक शिक्षण दिया जा रहा है । जिससे नगर में अपूर्व धर्म प्रभावना हो रही है ।

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